श्रावणी ने तो फोन काट दिया था, लेकिन दूसरी तरफ मोक्ष के हाथों से फोन गिरते-गिरते बचा था। उसने अपने मुँह में आया सलाइवा गटक लिया और खुद से कहा, "इस लड़की के दिमाग में हमारी सुहागरात की बात किसने डाली? इस लड़की को पता भी होगा कि सुहागरात में होता क्या है या यूँ ही हवा में उड़ रही है? जब उसके पास जाऊँगा और उसे बताऊँगा न कि सुहागरात क्या होती है, तब पता चलेगा इस लड़की को! और फिर डर-डर के मेरे से भागेगी।"
इसी उम्मीद में कि जैसे ही वह उसे सुहागरात का रियल मीनिंग बताएगा, श्रावणी उससे दूर हो जाएगी, वह इसी आस में बैठ गया कि ऐसा कुछ भी घर जाकर उसके साथ नहीं होने वाला है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ, श्रावणी जिसे सुहागरात का एकदम करेक्ट मीनिंग पता था, वह अब अपनी पढ़ाई को छोड़कर क्लोजेट में अपने लिए कपड़े देखने लगी थी।







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